Indian Army Female Recruitment:लखनऊ में बेट‍ियों के सपनों को लगेे पंख,7:30 मिनट में पूरी की 1600 मीटर की दौड़

लखनऊ: सेना में जाने की चाहत मुझे यहां तक खींच लाई। मुझे नहीं पता मुझे नौकरी मिलेगी या नहीं, लेकिन मैं तब तक प्रयास करती रहूंगा जब तक मेरा सेना में हो नहीं जाता। मैं अपने गांव में भी दौड़ व खेलकूद में भाग लेती रही हूं। बचपन से ही सेना में जाने की चाहत आज मुझे आगरा से लखनऊ ले आई। मैंने सेना का विज्ञापन देखा था, मैंने भी फार्म भर दिया। आज लग रहा है कि पुरानी मेहनत रंग ला रही है। यह कहना था कि आगरा से आई आरती का। आरती ने लखनऊ छावनी स्थित एएमसी केंद्र में दौड़ व लंबी कूद में प्रतिभाग किया। कुछ ऐसी ही उम्मीदों के साथ यूपी की अलग अलग जिलों से आज लड़कियों ने सेना के मैदान में दमखम दिखाते हुए यहं बतलाने का प्रयास किया कि हम भी किसी से कम नहीं हैं। 

सेना ने आठ हजार अभ्यर्थियों में 5,898 को चुना गया था। सेना द्वारा पहले साढ़े सात मिनट में सोलह सौ मीटर दौड़ लगानी थी। इनमें कइयों लड़कियों ने बाजी मारने में सफल रही। दौड़ का राउंड पूरा करने पर ग्रुप वन और आठ मिनट में पूरा करने पर अगले राउंड में भेजा जा रहा था। लखनऊ छावनी स्थित सेना चिकित्सा कोर केंद्र एवं कॉलेज में महिला सैन्य पुलिस भर्ती में उत्तर प्रदेश के 75 जिले और उत्तराखंड के 15 जिले की लड़कियों ने शिरकत कर रही हैं. यह भर्ती 18 से 30 जनवरी तक चलेगी। यह जानकारी एडीजी रिक्रूटमेंट उत्तर प्रदेश व उत्तराखंड एनएस राजपुरोहित ने दी।

70 अभ्यर्थियों का हुआ कोविड टेस्ट

सेना के अधिकारियों ने बताया कि भर्ती में आने वाली अभ्यर्थियों को पूर्व में ही निर्देश दिए गए थे कि 48 घण्टे पहले अपना टेस्ट कराकर अपनी जांच रिपोर्ट साथ लाएं। पहले दिन कई अभ्यर्थी अपनी जांच रिपोर्ट लेकर नहीं आई। ऐसी 70 महिला अभ्यर्थियों का कोरोना टेस्ट किया गया। अफसरों ने अपील की है कि परीक्षा में कोविड रिपोर्ट लेकर ही आए।

सेना यानी देश सेवा की इच्छा किसमें नहीं होती। यही जज्बा यहां तक ले आया। नौकरी अगर मिलती है तो आगे भी सेना में ऊंचे पदों तक पहुंचने के लिए प्रयासरत रहूंगी। क्योंकि देश भक्ति से बढ़कर कुछ नहीं है। मैं अपने मथूरा के लिए मिसाल बनना चाहती हूं।   -सपना, मथुरा

सेना में जाने की चाहत यहां तक मुझे ले आई। सपने देखा करती थी, अब लग रहा है वह पूरे हो रहे हैं।   -आरती कुमारी, आगरा

नौकरी के लिए प्रयासरत थी। सेना में परीक्षा देने का मौका मिलेगा। सोचा नहीं था। बुलावा पत्र जब आया, तब से मैं उत्साहित थी। मुझे उम्मीद है कि मेरी चयन होगा। क्योंकि मेरे अंदर अनुशासन है और अनुशासन सेना का मूलमंत्र है।  -अंजलि सिंह, रायबरेली

देशभक्ति के साथ साथ जीवन में अनुशासन बेहद जरूरी है। सेना यह दोनों चीजे हमे सीखाती हैं। आज मैं बेहद खुश हूं। मैं ऊपर वाले प्रार्थना कर रही हूं कि मेरा अगर होत है तो मैं पूरी नौकरी अपना सौ फीसद बेहतर करुंगी।

-सोनम पाल, जालौन