लोको दरगाह के उर्स में कुल फातिहा और दुआ के बाद ऑनलाइन समापन


फर्रूखाबाद: तीन दिनी लोको दरगाह के उर्स का ऑनलाइन समापन रविवार को हो गया। उर्स में बहरूनी और मुकामी जायरीनों की मनाही रही। सज्जादा नशीन मुहम्मद शरीफ खांन मोहब्बत शाह की जेरे सरपरस्ती में वर्किंग कमेटी के बीच उर्स की रस्म अदायगी की गई। कुल फातिहा और दुआ के बाद 260 वां उर्स पुरखुलूस माहौल में सम्पन्न हो गया।

फतेहगढ़ लोको स्थित हजरत शहाबुद्दीन औलिया की दरगाह के उर्स के 260 वर्ष के इतिहास में पहली बार जायरीन नहीं पहुंचे। लोको दरगाह के उर्स में प्रति वर्ष हजारों की संख्या में बहरूनी और मुकामी जायरीन पहुंचते थे। लेकिन कोरोना काल को देखते हुए दरगाह कमेटी नें ऑनलाइन उर्स कराने का फैसला लिया था। दरगाह के उर्स में शामिल होने वाले अकीदतमंदों के आने पर रोक लगाई गई। तीन दिनी उर्स का आगाज शुक्रवार को कुरआन ख्वानी के साथ हुआ था।

उर्स के आगाज में महज छह लोग शामिल हुए थे। उर्स के दूसरे दिन शनिवार को होने वाली महफिल और चादर गागर जुलूस का भी आयोजन नही किया गया। रविवार को उर्स के कुल शरीफ में तीन दर्जन के लगभग वर्किंग कमेटी के लोग ही शामिल हुए। इस मौके पर कमालू कब्बाल नें कलाम पेश किए। दरगाह में चादरपोशी का एहतमाम किया गया। कुल फातिहा बाद मुल्क से कोरोना संक्रमण के खात्मे की दुआ की गई।

नायाब सज्जादा नशीन शाह मुहम्मद वसीम ने बताया कि कोरोना काल को देखते हुए पहली बार उर्स में जायरीनों की एंट्री पर रोक लगाई गई। अगले वर्ष से जैसे उर्स मनाया जाता था उसी तरह से मनाया जाएगा। कासिम साबरी, नदीम खान, सलमान कबीर, अराफात मोहम्मद, शाहरुख हुसैन, दाऊद अली, शहजाद अंसारी, हाफिज आरिफ खान, मोहसिन खान, रफत हुसैन आदि रहे।
तबर्रुक और लंगर पर रही रोक

कोरोना काल को देखते हुए लोको दरगाह के उर्स के समापन के मौके पर चलने वाले लंगर पर रोक रही। उर्स के मौके पर लंगर में शामिल होने को हजारों लोग दरगाह पहुंचते थे और लंगर का लुत्फ उठाते थे। वहीं कुल शरीफ के मौके पर तबर्रुक तक्सीम किया जाता था। उस पर भी रोक लगाई गई। इस मौके पर डिब्बा बंद तबर्रुक तक्सीम किया गया। इस मौके पर दरगाह पहुंचने वाले सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करते रहे और मास्क लगाए रहे। इस बार पंजाब के पंजाबी जायरीन नहीं पहुंचे।