बात लफ़्ज़ों में बयां न होगी वो कहता हूं, हिंदी हूं मैं हिंदी से प्रेम करता हूं


फर्रूखाबाद: श्रीकांत पांडेय अभिनेता व संस्थापक “लफ़्ज़ों से परे…“ ने कहा कि मुझे इस बात पर बहुत गर्व होता है मेरी मातृभाषा हिंदी है और मेरा जन्म हिंदुस्तान में हुआ। हिंदी एक ऐसी भाषा है जिसमें अपनेपन की मिठास है हिंदी में मुस्कराहट है, दर्द है आंसू है, भाव है, एहसास है इन्हीं एहसासों से भरे हैं तमाम किस्से कहानियां, हिंदुस्तान एक ऐसा देश है जहां का कण-कण में एक कहानी है, मुझे उन कहानियों से प्रेम है, हिंदी के बिना हिंदुस्तान की कल्पना भी नहीं की जा सकती है। सभी जानते हैं कि अंग्रेजी एक अंतरराष्ट्रीय भाषा है। मैं अपने विचार से कहना चाहूंगा कि अंग्रेजी सभी को सीखना चाहिए लेकिन उसे अपने ऊपर हमें कभी हावी नहीं होने देना है। अगर अंग्रेजी हमारे ऊपर हावी हो गई तो हम अपनी भाषा और संस्कृति सबको नष्ट कर देंगे। इसलिए आज से ही सभी को हिन्दी के लिए कोशिश जारी कर देनी चाहिए। अगर हमने शुरुआत नहीं की तो हमारी राजभाषा एक दिन संस्कृत की तरह प्रतीकात्मक हो जाएगी जिसके जिम्मेदार और कोई नहीं, हम लोग ही होंगे।