प्रवासियों का मोह भंग, निकल पड़े नौकरी करने


फर्रूखाबाद: महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना के जरिए रोजगार के जो अरमान प्रवासियों ने पाल रखे थे वह बारिश में चकनाचूर हो गए हैं। हजारों प्रवासी फिर से बेरोजगार हो गए हैं। इनमें मौका देखकर और रोजगार की आस में बड़ी संख्या में प्रवासियों की वापसी दिल्ली समेत विभिन्न शहरों में तेजी के साथ बढ़ी है। वैसे भी बारिश में मनरेगा का काम काफी हल्का हो जाता है।

ऐसे में मजदूरों के सामने रोजगार को लेकर दिक्कत खड़ी है। वैसे भी प्रवासी मनरेगा के काम में ज्यादा रुचि नहीं ले रहे थे। क्योंकि इससे भला नहीं हो रहा था। जिले में 26 जून के विशेष दिवस पर भले ही 48162 मजदूरों को एक दिन में काम दिया गया था। इसके बाद से ही मजदूरी का ग्राफ लगातार घट गया। इसका सबसे अहम कारण है कि जो मजदूर दिल्ली, महाराष्ट्र, राजस्थान, गुजरात, बिहार आदि शहरों में अच्छे काम पर लगे हुए थे वे लोग मनरेगा में ज्यादा रुचि नहीं दिखा रहे थे।

उन्होंने काम चलाने को जॉब कार्ड तो बनवा लिए थे मगर उन प्रवासियों के काम की स्थिति भी ठीक नहीं थी । जो जॉब कार्ड धारक पहले से काम कर रहे थे वहीं मनरगा में काम की रफ्तार बढ़ाने के कार्य में लगे हुए थे। शासन की ओर से जब प्रवासियों को काम दिए जाने पर जोर लगाया गया तो आनन फानन में प्रवासियों के नए जॉब कार्ड तो बनवा दिए गए मगर इनमें ऐसे भी सैकड़ों जॉब कार्ड धारक हैं जो कि बगैर सूचना दिए ही दिल्ली समेत विभिन्न शहरों में अपने पुराने स्थान पर नौकरी करने चले गए। वहीं बारिश की वजह से काम भी इस समय ज्यादा नहीं है। बारिश में सिर्फ पौधरोपण और जल संरक्षण व नहरों के किनारे पगडंडियों पर ही काम है।

इसके अलावा शेष कार्य बाधित चल रहे हैं। ऐसे में ग्राफ भी नीचे आ रहा है। हाल ही में प्रमुख सचिव की ओर से मनरेगा में काम की रफ्तार बढ़ाए जाने के निर्देश दिए गए थे। कहा गया था कि मनरेगा में किसी प्रकार की अनियमितता बर्दाश्त नहीं होगी। वैसे मनरेगा के जिले के आंकडों पर गौर करें तो शनिवार को जिले में 24874 मजदूरों ने काम किया। इसमें प्रवासियों की संख्या बमुश्किल डेढ़ से दो हजार के बीच ही होगी।