कला साहित्य के पुरोधा ओमप्रकाश कंचन को श्रद्धा सुमन अर्पित कर दी गई श्रद्धांजलि


फर्रुखाबाद: साहित्यिक सामाजिक संस्था अभिव्यक्ति के बैनर तले नगर की विभिन्न सामाजिक साहित्यिक संस्थाओं के लोगो ने दिवंगत आचार्य ओमप्रकाश मिश्र कंचन को लॉकडाउन के नियमो का पालन करते हुए चौक खोया बाजार स्थित मोहन लाल गौड़ के आवास सभागर में श्रद्धा सुमन अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी।

कार्यक्रम की अध्यक्षता अरुण प्रकाश तिवारी ददुआ व संचालन उपकार मणि उपकार ने किया। आचार्य कंचन को श्रद्धाजंलि देते हुए संस्कार भारती की संस्था प्रमुख डॉक्टर रजनी सरीन ने कहा कंचन जी बहुमुखी प्रतिभा के धनी थे। उन्होंने नगर को एक उन्होंने साहित्य कला संगीत के रूप में नगर को पहचान दिलाई। संस्कार भारती में राष्ट्रीय स्तर पर उन्होंने अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया। वह सदैव हमारी स्मृतियों में जीवित रहेंगे। राष्ट्रीय कवि डॉक्टर शिवओम अम्बर ने कहा कि हर स्थिति को मुस्कुरा कर सहन कर लेना गुरुवर कंचन जी की विशेषता रही।

उनके जन्म दिन 5 अक्टूबर को कंचन दिवस के रूप में मनाने की घोषणा की इस कार्यक्रम का संयोजक बनाकर उसी दिन एक युवा साहित्यकार को कंचन सम्मान दिए जाने की घोषणा की। वही महेश पाल सिंह उपकारी ने प्रति वर्ष एक वरिष्ठ साहित्यकार को कंचन स्मृति सम्मानदेने की घोषणा की।

डॉक्टर संतोष पाण्डेय ने कहा कि कंचन जी का स्मरण ही अपने मे बड़ी बात है। यश भारती से सम्मानित डॉक्टर राजपूत ने कहा चार पीढ़ियों के स्तम्भ रहे कंचन जी हमेशा याद आएँगे। आचार्य कंचन के नाती मृगांग दीक्षित ने उनके संस्मरण सुनाए और उनके कार्यक्रम में सहयोग देने की बात कही।

संस्कार भारती के प्रान्तीय महामंत्री सुरेंद्र पाण्डेय ने कहा आचार्य कंचन जी कला साहित्य संगीत नाटक लोक कला के विद्वान पण्डित थे। उनके शिष्य रहे राम अवतार शर्मा इन्दु ने कहा कि गुरुदेव ने हाजी विलायत अली व लालन पिया पर बहुत गहरे शोध किये और हमारो छात्र छात्राएं तैयार की।

इस मौके पर श्रद्धाजंलि देने वालो में भारती मिश्रा, रविन्द्र भदौरिया, ब्रजेन्द्र कुमार श्रीमाली, विद्या प्रकाश दीक्षित, महेश वर्मा, ज्योति स्वरूप अग्निहोत्री, भूपेंद्र प्रताप सिंह, रामशंकर अवस्थी, अबोध, नलिन श्रीवास्तव, वैभव सोमवंशी, ब्रजकिशोर सिंह आदि पुष्पांजलि देकर जाते रहे।