गांधीजी के ‘तीन बुद्धिमान बंदरों’ की संगमरमर की मूर्ति, किताबें और चरखा ट्रंप को तोहफे में मिली


भारत की अपनी पहली यात्रा पर आए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप एवं उनकी पत्नी मेलानिया को साबरमती आश्रम पहुंचने पर गांधीजी के ‘तीन बुद्धिमान बंदरों’ की संगमरमर की मूर्ति और महात्मा गांधी की आत्मकथा पुस्तक का विशेष संस्करण तोहफे स्वरूप भेंट की गयी।

अमेरिकी राष्ट्रपति को शुभ प्रतीक के रूप में गांधीजी से जुड़ी सदाचार की ताबीज भी भेंट की गई। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने ट्रंप को तीन बुद्धिमान बंदरों की मूर्ति भेंट की जिसमें एक बंदर ‘बुरा मत सुनो, दूसरा बुरा मत देखे और तीसरा बुरा मत कहो’ को प्रदर्शित करता है। यह उस मूर्ति की प्रतिकृति है जो महात्मा गांधी को 1933 में एक जापानी भिक्षु ने भेंट की थी।

मूर्ति भेंट करते हुए मोदी ने तीनों बंदरों के संदेश को ट्रंप और उनकी पत्नी मेलानिया को समझाया और उन्होंने ध्यानपूर्वक इसे सुना। साबरमती आश्रम के एक न्यासी कार्तिकेय साराभाई ने कहा कि आश्रम ने ट्रंप दंपत्ति को गांधीजी की सदाचार की ताबीज भेंट की जिसे उन्होंने अगस्त 1947 में लिखा था।

इसमें गांधीजी ने लिखा है कि सार्वजनिक जीवन में लोगों के बारे में निर्णय करने से पहले सबसे गरीब व्यक्ति के चेहरे को याद कर लें। उन्होंने कहा कि हमने उन्हें महात्मा गांधी की आत्मकथा पुस्तक का विशेष संस्करण ‘ द स्टोरी आफ माई एक्सपेरिमेंट विद ट्रूथ’ तथा पेंसिल से बनाया गया गांधीजी का वह दुर्लभ चित्र भेंट किया जब वे लंदन में 10 डाउनिंग स्ट्रीट से बाहर आ रहे थे। साबरमती आश्रम आने पर ट्रंप और उनकी पत्नी ने ‘चरखे’ में खासी रुचि दिखायी। ट्रंप दंपति को चरखा भी भेंट स्वरूप दिया गया।