शहीद वीर अब्दुल हमीद की जांबाजी पर युवा कवयित्री वैष्णवी चतुर्वेदी ने किया देशभक्ति का अनोखा चित्रण

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कायमगंज/फर्रूखाबाद: युवा कवयित्री वैष्णवी चतुर्वेदी अपने पिता वेद प्रकाश चतुर्वेदी की चार संतानों में सबसे पहली संतान है। और इस समय वह शकुंतला देवी डिग्री कॉलेज में बीए द्वितीय वर्ष की छात्रा है।इस मेधावी छात्रा ने आज एक काव्य गोष्ठी में वीर अब्दुल हमीद की जाबांज जिंदादिली एवं देश प्रेम की कविता प्रस्तुत कर बार-बार श्रोताओं को तालियां बजाने पर विवश कर दिया। कवयित्री ने अपनी प्रस्तुति देकर कहा कि हिंद की जय, हिंद की जय शोर चारों ओर था।यह वर्णन उस समय का है। जब भारत की सीमा पर पाकिस्तान ने पूरी ताकत के साथ हमला किया था। उस समय वीर अब्दुल हमीद अपने घर पर छुट्टियां बिता रहा था। संदेश आते ही अपने परिवार से विदा ले वह सीमा पर दुश्मन को मुंहतोड़ जवाब देने के लिए रवाना हुआ। कवयित्री के अनुसार वीर अब्दुल हमीद ने पाकिस्तान के टैंकों को गाजर मूली की तरह नष्ट कर दुश्मन को ऐसा सबक सिखाया। कि उसकी जांबांजी के आगे पाकिस्तान की सारी कूबत नाकाम साबित हो गई।ऐसे देश प्रेमी जांबाज सैनिक को आज भी पूरा भारत नमन करता है। साथ ही जांबाज भारतीय सैनिक पर देश को नाज है। अपने स्वर और वीर रस से ओतप्रोत कविता जिस समय यह युवा कवयित्री मंच से ललकार कर प्रस्तुत कर रही थी। उस समय ऐसा दृश्य भी कई बार आया कि श्रोता एवं दर्शक अपने आंसू रोक नहीं पाए। पूरे समय गोष्ठी परिसर तालियों की गड़गड़ाहट से गुंजायमान बना रहा।