वासंती काव्य समारोह में वही देश प्रेम की रस धारा

कायमगंज/फर्रूखाबाद: नगर से सटे गांव घसिया चिलौली स्थित एक निजी प्रबंधन वाले कॉलेज में वसंतोत्सव काव्य समारोह का आयोजन हुआ। जिसमें स्थानीय व बाहर से आए कवियों ने अपनी साहित्य मेधा का परिचय देते हुए श्रोताओं को बार बार तालियां बजाने पर मजबूर कर दिया। आयोजन का प्रारंभ गीत मातृ वंदना से शुरू हुआ। फतेहगढ़ से आए शायर शरीफ कुरैशी ने शेर पढ़कर कहा कि -’लगी है आग यूं तो शहर भर में“पर दाद पाई। युवा कवि जयप्रकाश मिश्र ने गीत प्रस्तुत कर कहा कि -नदी अपनी ही प्यास बुझाएगी, गैरों की मोहब्बत का समंदर न ढूंढिए। कन्नौजी शायर मुफीद ने नगमा पेश कर फरमाया कि- मत पूछिए वतन से मुझे कितना प्यार है।। वही ख्याति लब्ध गीतकार पवन बाथम ने प्रीति की व्यथा को स्वर देते हुए आवाज दी -तेरे बिन जिंदगी में रहा कुछ नहीं।।इस अवसर पर प्रोफेसर रामबाबू मिश्र रत्नेश ने वर्तमान का चित्रण करते हुए आवाज दी- हिरण जो बहुत उछलते थे,कभी इन पर अब भेड़ियों का पहरा है।।इस अवसर पर मशहूर शायर अब्दुल बहाव बहार ने अपने अंदाज में यूं कहा कि- कहने को तो सब अपने हैं, वक्त पर कोई काम ना आया।।गोष्ठी में देवेश, सैयद राशिद अली, मनीष गौड़ युवा कवयित्री वैष्णवी, राम सिंह गौतम,डॉ सुनीत कुमार सिद्धार्थ, सौरभ आदि ने भी काव्य पाठ कर समा बांधा।